शिक्षक-छात्रों द्वारा तैयार सीड बॉल कलेक्टर को भेंट

सक्ती। जिले के शासकीय प्राथमिक शाला झालरौंदा के छात्रों और शिक्षकों के द्वारा बनाया गया सीड बॉल को कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो को भेंट किया गया। प्रकृति शिक्षण समूह के साथ कार्य करते हुए छात्रों को सीड बॉल बनाने सिखाने के लिए कार्यशाला का आयोजन शिक्षिका चंचला चन्द्रा द्वारा किया गया था। समूह के द्वारा पूरे राज्य में लगभग छः लाख सीड बॉल बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस कार्य शाला के द्वारा छात्रों को पर्यावरण के प्रति जागरुक करने के लिए छात्रों को सीड बॉल बनाने के लिए प्रेरित किया गया। प्राचीन भारत में चरक संहिता में बीज को गोबर में लपेटकर बोना लिखा गया है। आदिवासी आज भी महुआ-आम के बीज गोबर में लपेटकर फेंकते हैं। सीड बॉल के द्वारा चिड़िया के बीज को खा जाने से मिट्टी का कवच बीज को छुपा देता है बारिश में बह जाने से बचाता है, धूप में सूख जाए तो मिट्टी नमी को रोकती है, खाद ताकत देती है। खरपतवार बीज को दबा नहीं पाते हैं। 2 हफ्ते की हेड-स्टार्ट मिलती है और इसमें उगने की सफलता दर अधिक होती है। सीधे बीज फेंको तो 5 प्रतिशत उगता है। सीड बॉल से 70-80 प्रतिशत उग जाता है। इस सबसे प्रोत्साहित होकर सभी छात्रों द्वारा कम से कम 100 सीड बॉल बनाने का संकल्प लिया गया था, जिसमें अधिकांश छात्रों द्वारा कार्य पूर्ण कर लिया गया है। छात्रों के इस मेहनत को जिले के विभिन्न क्षेत्र में पहुंचाने के उद्देश्य से शिक्षकों द्वारा अलग-अलग जगह इस सीड बॉल को पहुंचाया जा रहा है। सीड बॉल को आते-जाते रास्ते के किनारों में या खाली मैदानों में फेंक कर पौधे को उगाया जाता है।




