बिहान स्व-सहायता समूह की दीदियों ने बीज जड़ित राखियों से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

सक्ती। रक्षाबंधन के पावन पर्व को पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण से जोड़ते हुए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) अंतर्गत ग्राम पंचायत पलाड़ी कला के राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा आकर्षक एवं पर्यावरण हितैषी बीज जड़ित राखियां तैयार की जा रही हैं। इन राखियों के विक्रय के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में स्टॉल लगाया गया, जहां इको-फ्रेंडली राखियों की खरीदारी के लिए लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला।
कलेक्ट्रेट परिसर में लगाए गए स्टॉल का नवपदस्थ कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन सहित विभिन्न जनप्रतिनिधियों, अधिकारी-कर्मचारियों एवं आम नागरिकों ने अवलोकन किया। कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन ने बीज जड़ित इको-फ्रेंडली राखी खरीदकर बिहान समूह की दीदियों का उत्साहवर्धन किया तथा उनकी इस अभिनव पहल की सराहना की। समूह की महिलाओं ने बताया कि इन हस्तनिर्मित राखियों को विभिन्न प्रकार के बीजों एवं प्राकृतिक रेशों से तैयार किया गया है। राखियों में धनिया, कद्दू, करेला, भिंडी, धान, मूंग, भुट्टा, मूंगदाल, राजमा, खीरा, अरहर, पालक भाजी, लाल भाजी सहित अन्य सब्जियों एवं फसलों के बीज शामिल किए गए हैं। इन राखियों की विशेषता यह है कि रक्षाबंधन पर्व के बाद इन्हें फेंकने के बजाय मिट्टी में रोपकर इनमें मौजूद बीजों से पौधे उगाए जा सकते हैं। इस तरह राखी का त्योहार भाई-बहन के स्नेह के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और किचन गार्डन को बढ़ावा देने का माध्यम भी बन रहा है। इन बीजों से घर पर पौष्टिक सब्जियां उगाकर परिवार को ताजी एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
कलेक्टर श्रीमती जयश्री जैन ने समूह की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इको-फ्रेंडली राखियों का निर्माण नारी सशक्तिकरण, स्वरोजगार और पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संगम है। ऐसी अभिनव पहल ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ ही आम लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
विभिन्न शहरों में भी हो रहा राखियों का विक्रय
राधा कृष्ण स्व-सहायता समूह की दीदियों द्वारा तैयार इन इको-फ्रेंडली राखियों की मांग को देखते हुए कोरबा, जांजगीर, बिलासपुर सहित कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर में स्टॉल लगाकर राखियों का विक्रय किया जा रहा है। इसके अलावा ऑर्डर के माध्यम से भी राखियां उपलब्ध कराई जा रही हैं। इस पहल से समूह की महिलाओं को राखी त्योहार के सीजन में अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है और स्थानीय स्तर पर तैयार उत्पादों को बाजार भी मिल रहा है।




