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La Nina को लेकर दो राय: अमेरिकी मौसम एजेंसी और भारतीय मौसम विभाग क्यों कह रहे अलग बातें

जांजगीर फर्स्ट न्यूज। अमेरिकी मौसम एजेंसी CPC का कहना है कि ला नीना शुरू हो चुका है। लेकिन IMD, BoM और APCC कह रहे हैं कि ला नीना अभी नहीं, लेकिन जल्द आएगा। मगर दुनिया की सभी एजेंसियां इस बात पर सहमत हैं कि ला नीना अल्पकालिक रहेगा और मार्च 2026 तक समाप्त हो जाएगा। अगले कुछ हफ्तों के समुद्री और वायुमंडलीय संकेत यह तय करेंगे कि इसका दक्षिण भारत के मौसम पर कितना असर पड़ेगा। अमेरिका की मौसम एजेंसी NOAA के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) ने दावा किया है कि ला नीना की स्थिति विकसित हो चुकी है, लेकिन भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और अन्य वैश्विक एजेंसियां इससे इत्तेफाक नहीं रखतीं। IMD का कहना है कि अभी एल नीनो–सदर्न ऑसिलेशन (ENSO) की न्यूट्रल स्थिति बनी हुई है और ला नीना आने वाले महीनों में विकसित होगा। यह विरोधाभासी संकेत इसलिए अहम हैं क्योंकि ला नीना का सीधा असर बारिश, सर्दियों, चक्रवातों और वैश्विक मौसम पैटर्न पर पड़ता है।

अमेरिकी मौसम एजेंसी का क्या दावा

CPC (क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर) ने अपने ताज़ा अपडेट में कहा है कि प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र सतह का तापमान सामान्य से नीचे चला गया है, जो ला नीना का स्पष्ट संकेत है। एजेंसी ने बताया कि समुद्री सतह का तापमान लगातार कम हो रहे हैं। पूर्वी हवाएं (Easterlies) मजबूत हुई हैं और डेटलाइन (Pacific Date Line) के पास बादल कम बने, यानी कम वर्षा। CPC का अनुमान है कि यह हालात उत्तरी गोलार्ध की सर्दियों तक जारी रहेगी, यानी मार्च 2026 तक इसे बने रहने का अनुमान है।

IMD और दूसरी एजेंसियां क्या कह रहीं

वहीं दूसरी ओर भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) का कहना है कि अभी ला नीना की स्थिति नहीं बनी है, बल्कि ENSO न्यूट्रल स्थिति जारी है। हालांकि मॉडल्स बता रहे हैं कि ला नीना आने वाले महीनों में विकसित होगा और धीरे-धीरे मजबूत होगा। IMD ने इसके साथ यह भी कहा कि भारतीय महासागर में निगेटिव IOD की स्थिति बनी हुई है, जो दक्षिण भारत के लिए बारिश में अहम भूमिका निभाती है। यह स्थिति पोस्ट-मानसून सीजन तक जारी रह सकती है। इसके साथ ही ऑस्ट्रेलिया की मौसम एजेंसी (BoM) और एशिया-पैसिफिक क्लाइमेट सेंटर (APCC) भी यही मानते हैं कि ला नीना दिसंबर 2025 के आसपास शुरू होगा और मार्च 2026 तक खत्म हो जाएगा। इस तरह तीन प्रमुख वैश्विक एजेंसियां अमेरिकी मौसम एजेंसी CPC से अलग राय रखती हैं।

भारत के लिए ला नीना के मायने

भारत में इस समय उत्तर-पूर्व मानसून (October–December) सक्रिय है, जो तमिलनाडु, केरल, आंध्र प्रदेश और दक्षिणी कर्नाटक के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। IMD का संकेत है कि निगेटिव IOD के साथ विकसित होता ला नीना, दोनों मिलकर दक्षिण भारत में बारिश बढ़ा सकते हैं। इसलिए तमिलनाडु और दक्षिणी प्रायद्वीप में नवंबर–दिसंबर के दौरान बारिश पर इसका असर दिख सकता है।

समुद्र में क्या चल रहा है

ताज़ा रिपोर्टों में पता चला है कि मध्य और पूर्वी प्रशांत में तापमान तेजी से नीचे जा रहा है। पश्चिमी प्रशांत भी धीरे-धीरे ठंडा हो रहा है। इंडोनेशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया में बादल और बारिश बढ़ी है। डेटलाइन के आस-पास बारिश कम हुई है और इन संकेतों से पता चलता है कि ला नीना काफी करीब है। IMD ने बताया कि इस समय MJO (Madden-Julian Oscillation) फेज 6 में है और जल्द ही फेज 7 में जाएगा। यह बदलाव, अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और दक्षिण भारत की बारिश पर बड़ा असर डाल सकता है।

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