
रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) भर्ती घोटाले की जांच में बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गुरुवार को पाँच आरोपितों को गिरफ्तार किया। इनमें आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और उनके नजदीकी रिश्तेदार शामिल हैं। गिरफ्तारी 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भाई-भतीजावाद के आरोपों से जुड़े मामले में हुई है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में जीवन किशोर ध्रुव, तत्कालीन सचिव, सीजीपीएससी; आरती वासनिक, तत्कालीन नियंत्रक परीक्षा; सुमित ध्रुव, डिप्टी कलेक्टर (तत्कालीन सचिव का पुत्र); मिषा कोसले, डिप्टी कलेक्टर (तत्कालीन अध्यक्ष के भाई की पुत्रवधू); और दीपा आदिल, जिला आबकारी अधिकारी (तत्कालीन अध्यक्ष के भाई की पुत्रवधू) शामिल हैं।
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई चयन प्रक्रिया में हेराफेरी और पक्षपात से जुड़े बड़े षड्यंत्र की परतें खोलने के प्रयास का हिस्सा है। सीबीआई ने यह मामला (RC1242024A0004) 9 जुलाई 2024 को दर्ज किया था, जो छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 16 फरवरी और 10 अप्रैल 2024 को जारी अधिसूचनाओं के आधार पर हुआ। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव और अन्य अधिकारी, 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और साक्षात्कारों में अपने पुत्र, पुत्री और रिश्तेदारों का चयन करवाने में शामिल थे। 2021 भर्ती प्रक्रिया में ही 1,29,206 उम्मीदवारों ने प्रारंभिक परीक्षा दी, जिनमें से 2,548 मुख्य परीक्षा के लिए चुने गए। इनमें 509 अभ्यर्थियों ने साक्षात्कार चरण पार किया और 170 को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया गया। आरोप है कि चयनित उम्मीदवारों में कई आयोग के वरिष्ठ अधिकारियों से सीधे जुड़े हुए थे।
इससे पहले भी सीबीआई ने तत्कालीन अध्यक्ष, तत्कालीन डिप्टी कंट्रोलर ऑफ एग्जामिनेशन, चार चयनित उम्मीदवारों और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया था। सभी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। गिरफ्तार किए गए पाँचों आरोपितों को पुलिस रिमांड हेतु अदालत में पेश किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि अब जांच उन अन्य उम्मीदवारों की ओर भी बढ़ाई जाएगी, जिन्हें कथित रूप से परिणामों में धांधली से लाभ मिला। सीबीआई प्रवक्ता ने कहा कि व्यापक षड्यंत्र और अन्य अधिकारियों एवं उम्मीदवारों की संलिप्तता की जांच जारी है।




